Friday, 19 August 2011

बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के बीच भ्रष्टाचार पर परिपेक्ष्य अंतर:


बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के बीच भ्रष्टाचार पर परिपेक्ष्य अंतर:
एक बार एक गाँव में एक भैंस कूएं में गिर गयी. और आसपास बहुत दुर्गन्ध आने लगी... जब एक पंडित जी से इसका उपाय पुछा तो उत्तर मिला के इस कूएं में गंगा जल छिड़का जाये और हवन करवाया जाये.......१-२ महीने के बाद दुर्गन्ध फिर से आने लगी..लोग दुबारा पंडित के पास गए..पंडित ने पुछा के क्या तुम लोगों ने भैंस पानी से निकाली थी..लोगों ने जवाब दिया के... पंडित जी...भैंस तो हमने नहीं निकली वो तो अभी भी कूएं में है...पंडित जी ने कहा हे मूर्खो!!! जब तक भैंस पानी से बाहर नहीं निकालोगे.....गंगा जल और हवन अस्थायी तौर पर तो फ़ायदा कर सकता है...लेकिन उस रोग से मुक्त नहीं कर सकते...रोग का जब तक जड़ से इलाज नहीं करोगे..फिर से पनपने लगेगा.......सकता..ठीक उस प्रकार हे मेरे भोले भारत वासियों जन लोकपाल आपको थोड़े समय तक तो रहत दिला सकता है लेकिन अगर इस भ्रष्टचार नामक रोग का स्थायी इलाज़ चाहते हो तो बाबा रामदेव के आन्दोलन को विफल मत होने देना....जब तक विदेशों से कला धन वापिस नहीं आ जाता और भ्रष्टाचारी लोग सलाखों के पीछे अपना दंड नहीं भुगतते..चैन की सांस मत लेना.....

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